
अपनी राशि पर शनि की साढ़ेसाती के आरंभ होते ही हर प्राणी यह सोचकर भयभीत होने लगता है कि, अब क्या होगा ! किन्तु ये साढ़ेसाती की 2700 दिन की अवधि का कालखंड कष्टकारक ही हो ऐसा नहीं हैं। किसी भी राशि पर जिस पर शनिदेव की साढ़ेसाती आरंभ होने वाली हो उस राशि के किस अंग पर इनका विचरण होता है यदि आप इसे समझ कर उसी के अनुसार निर्णय एवं उपाय करें तो साढ़ेसाती एवं ढैय्या के अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है।
Shani Jayanti Shani Amavasya Date 2020: ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनि जयंती मनाई जाती है। इस बार 22 मई को शनि जयंती है। शनि से जुड़े दोषों से मुक्ति के लिए शनि अमावस्या पर शनिदेव की पूजा का विशेष महत्व होता है। ज्योतिष के अनुसार शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा होने पर व्यक्ति को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शनि के प्रकोप को कम करने के लिए शनि की विशेष अवसरों पर पूजा करने से अटके काम पूरे होते हैं और परेशानियों का अंत भी होता है। आइए जानते है शनि जयंती 2020 के मौक पर शनिदेव की पूजा और इसका महत्व।
कौन है शनि देव
शनिदेव सूर्यदेव और माता छाया की संतान हैं। पिता सूर्य के द्वारा माता छाया के अपमान के कारण शनिदेव हमेशा अपने पिता सूर्य से बैर भाव रखते हैं। फलित ज्योतिष में शनि को अशुभ माना जाता है। इनका स्वरूप काला रंग और ये गिद्ध की सवारी करते हैं। इन्हे सभी ग्रहों में न्याय और कर्म प्रदाता का दर्जा प्राप्त है। मकर और कुंभ राशि के स्वामी शनि देव हैं। यह बहुत ही धीमी चाल से चलते हैं। यह एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। शनि की महादशा 19 वर्षों तक रहती है। मान्यता है शनि देव जिस किसी पर अपनी तिरक्षी नजर रख देते हैं उसके बुरे दिन आरंभ हो जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें उनकी पत्नी ने शाप दिया था जिस कारण से शनि की नजर को बुरा माना जाता है। वहीं अगर शनि की शुभ दृष्टि किसी पर पड़ जाए तो उसका जीवन राजा के समान बीतने लगता है।
कौन है शनि देव
शनिदेव सूर्यदेव और माता छाया की संतान हैं। पिता सूर्य के द्वारा माता छाया के अपमान के कारण शनिदेव हमेशा अपने पिता सूर्य से बैर भाव रखते हैं। फलित ज्योतिष में शनि को अशुभ माना जाता है। इनका स्वरूप काला रंग और ये गिद्ध की सवारी करते हैं। इन्हे सभी ग्रहों में न्याय और कर्म प्रदाता का दर्जा प्राप्त है। मकर और कुंभ राशि के स्वामी शनि देव हैं। यह बहुत ही धीमी चाल से चलते हैं। यह एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। शनि की महादशा 19 वर्षों तक रहती है। मान्यता है शनि देव जिस किसी पर अपनी तिरक्षी नजर रख देते हैं उसके बुरे दिन आरंभ हो जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें उनकी पत्नी ने शाप दिया था जिस कारण से शनि की नजर को बुरा माना जाता है। वहीं अगर शनि की शुभ दृष्टि किसी पर पड़ जाए तो उसका जीवन राजा के समान बीतने लगता है।

क्यों की जाती है शनिदेव की पूजा
शास्त्रों में कहा गया है जिन जातकों के ऊपर हमेशा कष्ट, गरीबी, बीमारी और धन संबंधी परेशानी होती है उन्हें शनि देव की पूजा जरूर करना चाहिए। शनि देव की पूजा के लिए प्रत्येक शनिवार, शनि अमावस्या और शनि जयंती का दिन काफी महत्वपूर्ण माना गया है। शनि देव पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाने और काली चीजों का दान करने से शनिदोष का प्रकोप कम हो जाता है।

शनि देव की पूजा में क्या करें क्या नहीं
– शनिदेव की पूजा में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
– शनि देव के विशेष दिनों में मंदिर में जाकर उनके दर्शन जरूर करना चाहिए।
– शनि देव के साथ हनुमान जी के भी दर्शन और पूजा करने से शनि दोष से जल्दी छुटकारा मिलता है।
– शनि देव को तेल और नीला फूल जरूर चढ़ाएं।
– गरीबों को दान करना चाहिए।
– शनि की पूजा करते समय सूर्य की नहीं करनी चाहिए।
-कभी भी शनि देव की प्रतिमा के दर्शन करते समय उनकी आंखों में नहीं देखना चाहिए।