श्री शनि देव जंयती 22 मई शुक्रवार : महंत रोहित शास्त्री।

जम्मू कश्मीर :- ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को शनि जंयती मनाई जाती है ,इस वर्ष यह 22 मई शुक्रवार को है,इस विषय में श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के प्रधान महंत रोहित शास्त्री ने बताया नवग्रहों में शनि देव सबसे ज्यादा शक्तिशाली ग्रह है,शनिदेव न्याय प्रिय और दंडाधिकारी हैं इसलिए उन्हें कलयुग का न्यायाधीश कहते हैं।शनि का कार्य प्रकृति में संतुलन पैदा करना है इसलिए समस्त मानव जाति पर शनि का गहरा प्रभाव होता है। ज्योतिष के अनुसार शनि कर्म और सेवा का कारक होता है यानि इसका सीधा संबंध आपकी नौकरी और व्यवसाय से होता है। इसी वजह से शनि की चाल का असर आपकी नौकरी व व्यवसाय में सफलता और उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। इसके प्रभाव से ही मनुष्य के जीवन में बड़े बदलाव होते हैं। ये परिवर्तन सकारात्मक और नकारात्मक दोनों हो सकते हैं।,करोना महामारी के चलते घर में ही शनि देव की पूजा अर्चना एवं दान करें।

आओ जाने कैसे शनि देव को प्रसन्न करने के लिए शनि जयंती के दिन क्या करें।

काली गाय की सेवा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं,गरीबों, असहायों को काला कंबल सप्तधान्य, काले वस्त्र दान करें,इस दिन व्रत रखें, शनिदेव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करें,इन10 नामों से शनिदेव का पूजन करें कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मंद व पिप्पलाद,एक कांसे की कटोरी में तिल का तेल भर कर उसमें अपना मुख देख कर और काले कपड़े में काले उड़द, सवा किलो अनाज, दो लड्डू, फल, काला कोयला और लोहे की कील रख कर डाकोत (शनि का दान लेने वाला) को दान कर दें,हनुमानजी को चमेली के तेल का दीप जलाएं ,हनुमानचालीसा का पाठ करें ,शनिदेव का सरसों के तेल एवं काले तिल से अभिषेक करें,काले घोड़े की नाल का छल्ला शनि जयंती के दिन मध्यमा अंगुली में धारण करें,शमी वृक्ष की जड़ को विधि-विधान पूर्वक घर लेकर आयें। शनिवार के दिन श्रवण नक्षत्र में या शनि जयंती के दिन किसी योग्य विद्वान से अभिमंत्रित करवा कर काले धागे में बांधकर गले या बाजू में धारण करें। शनिदेव प्रसन्न होंगे तथा शनि के कारण जितनी भी समस्यायें हैं, उनका निदान होगा,सूर्योदय से पहले पीपल की पूजा करें और पीपल के पेड़ पर तेल में लोहे की कील डालकर चढ़ाएं,रविवार को छोड़कर शनिदेव की मूर्ति पर 43 दिन तक लगातार तेल चढांए, बंदरों और कुतों को गुड़ और काले चने खिलाएं साथ ही शनिदेव पर भी तेल के साथ काले तिल आर्पित करें, काले चमड़े के जूते,काले वस्त्र पहनें,।

इस दिन शनिदेव के चमत्कारी मंत्र जिन्हें पढ़ने से हर कष्टों का अंत होता है।

(1) ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शन्योरभिस्त्रवन्तु न:।

(2) ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:।

(3) कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम:।

सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:।

(4) शनि का तंत्रोक्त मंत्र- ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: ।

किसी भी विद्वान ब्राह्मण से या स्वयं शनि के तंत्रोक्त, वैदिक मंत्रों के 23,000 जाप करें या करवाएं।

*महंत रोहित शास्त्री (ज्योतिषाचार्य) अध्यक्ष श्री कैलख ज्योतिष एवं

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